Wednesday, February 2, 2011

Mahila aur Balvikas Mantralay [Bhart sarkar]ka khulasa.

आज महिला और बालविकास मंत्रालय ने खुलासा किया है की आपने मर्जीसे शाररिक सम्बन्ध[या सम्तिसे ]रखने की उम्र १६ साल करनेकी सिफारश बचोंकी लैंगिक अत्याचार प्रतिबंधक कानून में की गयी है और इसी कानुनमे १२ साल तक के लड़के तथा लडकियोंको "समागमना शिवाय"शाररिक निकटता रखने का कोही भी प्रस्ताव नियोजित कानून में नहीं है ऐसा केन्द्रीय  महिला बालविकास मंत्री माननीय कृष्णा तीरथ इनोने बताया.इसका मतलब इसके बाद १६ वर्ष से कम उम्र के लड़के लड़कियों के शाररिक संबंधो को गुन्हा मन जायेगा,या विधेयक आनेवाले आर्थ संकल्पीय आधिवेशन में लाया जायेगा.                                              उपरोक्त बातमी आज सभी वर्तमान पत्रों में छापी है सवाल ये है की आज देश में ऐसी कोणती परिस्तिती निर्माण हो गई की महिला बालविकास आत्याचार कानून में शंसोधन करके लड़के लडकियों की उम्र १८से घटाकर १६ वर्ष करनी पड़ रही है ? आज भी आपने देश कोहिभी लड़का या लड़की को बलिक समजने की उम्र २१और १८ है और इसी उम्र वाले लड़के लड़की योंको बलिक समजा जा सकता है और शादी कारने का आधिकार इसी उम्र में मिलता है फिर इस कानून में बदलाव कर के उम्र कम कारने की जरुरत काया है ? सरकार में बैठे लोग और कानून बनाने वाले सभी कानून के जानकर इस विषय में क्या सोचते है मालूम नहीं पर मेरेको ऐसा लगता है की इस तिरिकेसे बदलाव करना ठीक नहीं कारण इस का जो दुष परिणाम होगा वो सबसे जादा लडकियोंको होगा जोभी लैंगिक हत्याचार होते है उसमे ९५% महिला होती है  और उम्र की सीमा घटने से उनमे बढोतरी आएँगी कारण एक उम्र का डर ख़तम हो जायेगा इस से महिला योंको देहव्यापार के तरफ घसीट ने की संख्या में भी इजाफा होगा,इस कानुनमे बदलाव का नुकसान देश की लड़कियों को ही होगा,सरकार कानून में बदलाव कर कोनसा उदेष सफल करना चाहती है! क्या सरकार इस विषय में दबाव में है, कोही N G O इस कानून में बदलाव करवाना चाहता है,क्या  सरकार इस कानुनमे बदलाव करके लैंगिक वभिचार को निमंत्रण तो नहीं दे रही है ? सरकार के इस कदम का कोई भी विरोध कर नहीं रहा आज देश में कितने  संगठन है जो इन विषयो में बारबार बवाल मचाते है मगर आज कोई भी विरोध करते हुवे नहीं दिखरहा? मेरे को ऐसा लगता है सरकार के इस कदम से कानून का जो डर है वो ख़तम होजायेगा शायद ये कानून बनजयेगा तो हम देश के लड़के लड़की योंको कानूनन बड़ा तो बनादेंगे मगर उनका स्वाभाविक बचपना उनसे छीन लेंगे.
  अनुरोध ये है आप इस विषय में सोचे क्या सरकार का ये उचित कदम है कानून में बदलाव करना !   

Sunday, January 30, 2011

janral

क्या  फरक पड़ता है,  किसीके   जानेसे  या  आनेसे! 
क्या  फरक पड़ता है,  किसीके  हसनेसे या रोनेसे !
क्या फरक पड़ता है ,किसीके घुस्सा करनेसे या प्यार जतानेसे!
क्या फरक पड़ता है ,किसीके बतानेसे या छुपानेसे!

क्या फरक पड़ता है ,कोही साथ रहेनेसे या नाराहेनेसे!
क्या फरक पड़ता है, ऊपर आकाश में उड़नेसे या फिर निचे रस्तेपर पैदल चलनेसे!
सोचो फरक पड़ता है !
फरक पड़ता है,जब आकेलेमे कोही साथ आजाये!
फरक पड़ता है,जब आपको कोही खूब हसाए!
फरक पड़ता है,जब आपसे कोही खूब प्यार करे!
फरक पड़ता है,जब आपने मन की बात किसीको बताई जाये!
फरक पड़ता है,जब आप संकट में हो और आपके साथ कोही आजाये!
फरक पड़ता है!जित की उड़ान लेनेमे!
इसलिए आपनेआप को लोगो के सुख दुःख में शामिल करो,
तभी लोग आपने सुख दुःख में शामिल होंगे.
    जीवन एक आनंद मई यात्रा है,इसे सब समाज के साथ मिलकर ही पूरा किया जाना है!       

Tuesday, January 18, 2011

"Aadarsha"

"आदर्श"या शब्दाचा तसा आर्थ म्हणजे कही तरी निर्माण करणे की ते घडल्या नंतर त्याचे आनुकरण करण्याची लोकांची मानसिकता होणे,पण आपल्या महाराष्ट्रात राज्य सरकार मधील कही वरिष्ट मंत्री व सरकारी कर्मचार्याने आपसात संगम्मत करून एक "आदर्श"निर्माण केला आहे आणि यांचा हा आदर्श खरच त्यांचे अभिनंदन करण्या सारखा आहे कारण यांच्या या एका आदर्शा बरोबर आपल्या महाराष्ट्रात खुप वेगावेगले आनेक "आदर्श" घडले जसे मंत्री आणि सरकारी आधिकारी यांचा आपापसात संगमत करून कार्य करण्याचा आदर्श,सर्व नियमांचे उल्लंघन करून बनावट कागद पत्र तायर करून आपल्या आधिकराचा वापर करण्याचा आदर्श,आणि हो या आदर्श प्रकरणा मधे कोणाला काय मिळाले हे तर आता सर्वांचा समोर आले आहेच प्रतेकाने म्हणजे आगदी महानगर पलिकेतिल कर्मचार्या पासून ते राज्य सरकारच्या मुख्य सचिवा परेन्त आपापला वाटा घेउन एक चांगलाच  आदर्ष निर्माण केला आहे.या सर्व घडलेल्या घटनांचा आपल्या राज्याचे मुखमंत्री बलि ठरले व त्यानी राजीनामा दिला एखाद्या राज्याचा मुख्यामंत्र्यानी आशा प्रकारे जाणे हाही एक आदर्श च आहे,आत्ता आलेल्या नवीन मुखामंत्र्यानी कही आधिकर्याना आपले पदा चा राजीनामा देण्यास सांगितला हाही एक आदर्श प्रयत्न आहे,पण पहा त्या आधिकार्यां त एक उच्च आधिकारी आपले पद सोडण्यास तायर नहीं हाही एक आदर्श च आहे त्यानी स्पष्ट सांगितले की मी राजीनामा देणार नहीं हा किती मोठा आदर्श,पहा एका आदर्शा मधून किती आदर्श निर्माण केले,आच्हा या सर्व गोष्टी घडल्याच आणि आताच केंद्रीय पर्यावरण मंत्र्यानी पर्यावरण खात्याची मंजूरी शिवाय बांधकाम केल्या प्रकरणी दोषी ठरवून बांधकाम(संपूर्ण इमारत ) पडायचे आदेश दिले आणि तेहि ३ महिन्याचा आत आणि गमत म्हणजे या सर्व प्रकरणाचा तापस केंद्रीय पर्यावरण खात्याने २ महिन्यात पूर्ण केला आहेकी नहीं हा पण आदर्श,आता या इमारतीत जगा घेणारे लोक मुंबई उच्चा न्यायालयात जनाचा तयारीत आहेत म्हणजे पुन्हा एक आदर्श निर्माण होइल.
पहा एका  आदर्श  बरोबर किती आदर्श निर्माण केले गेले या सर्व गोष्टींचा विचार  करून पुढील वाटचाल करायची की एक मेकांचा राजकीय व शासकीय बलि घ्यायचा आणि नवीन "आदर्श "निर्माण करायचा याचा विचार व्हावा!
पण एक मात्र नक्की या आदर्श पासून कही शिकून आपल्या राज्य सरकारने कर्यपधातित सुधारणा करून एक आपल्या महाराष्ट्रातील जनासामन्या समोर "आदर्श"निर्माण करावा हीच आशा.  
                      

Tuesday, October 19, 2010

bhrashtachar

आज   समाजात व्याप्त असलेल्या आर्थिक वेव्हारा मधे सर्वात प्रचलित असा शब्द भ्रष्टाचार आहे ..पण शब्दाचा विचार केल्यास त्याचा अर्थ भरष्ट-आचार असा होतो  आचार म्हणजे   आपण रोज दैनंदिन  कामा मध्ये  लोकांन बरोबर  कसे वागतो त्यांचाशी कसे वेवहार करतो याचा याचा संपूर्ण आयाम  म्हणजे आचार आणि ज्याचा आचार भ्रष्ट त्याच्याच केलेल्या  वेव्हराला   भ्रष्टाचार    म्हणता       येईल  व्यत्ति   जेंव्हा आपल्या  स्वार्था करीता एखाद्या दुसरया कोणाच्या नुकसनाला जवाबदार राहतो  त्यालाच  भ्रष्टाचारी असे  म्हणतात .तसे पाहिल्यास भ्रष्टाचार हा एक विचार आहे  कोणताही व्यक्ति हा पाहिले विचारानी भ्रष्ट होतो आणि मागच आचारानी ,त्यासाठी हे समजुन घ्यावे लागेल की लोकांच्या विचारातून जोपरेंत्त भ्रष्टाचार संपणार नहीं भ्रष्टाचार हा संपू शकत नाही